ए डी एच डी, कारण, लक्षण, निदान- उपचार | Medtalks

ए डी एच डी, कारण, लक्षण, निदान- उपचार | Medtalks

ए डी एच डी | ADHD meaning in Hindi

ए डी एच डी अर्थात् अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर यह एक बच्चों में मानसिक स्वास्थ्य विकार है जिसके कारण के व्यवहार में अति सक्रियता पैदा होती है और एक ही कार्य पर लंबे समय तक अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर सकते है या अधिक समय तक एक ही जगह बैठने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। जिन परिवार में तनाव का माहौल बना रहता वहां ए डी एच डी की समस्या अधिक हो सकती है।यही मानसिक स्वास्थ्य विकार सिर्फ बच्चो को ही नहीं बल्कि युवाओं और वयस्कों को भी प्रभावित कर सकता है।

ए डी एच डी के कारण | Causes of ADHD in Hindi

ए डी एच डी का स्पष्ट कारण अभी तक ज्ञात नहीं हुआ है लेकिन शोधकर्ता के अनुसार इसके कुछ कारण हो सकते है।

1. आनुवंशिक कारण:- आनुवंशिक कारण यानी पारिवारिक समस्या यदि किसी परिवार में यह समस्या पहले से हो तो आने वाली पीढी या वर्तमान पीढी में यह बीमारी हो सकती है।

2. मस्तिष्क से सम्बन्धित बीमारी या चोट:- मस्तिष्क से सम्बन्धित किसी तरह की बीमारी या चोट लगने के कारण भावना या व्यवहार अनियंत्रित हो सकती है।

3. मस्तिष्क रसायन का असंतुलित होना:- इस विकार से प्रभावित बच्चों और वयस्कों के मस्तिष्क रसायन का संतुलन बिगड़ जाता है जिससे मस्तिष्क रसायन असंतुलित हो जाते है।

4. अविकसित मस्तिष्क: गर्भावस्था के समय पौष्टिक आहार न मिलने पर, धूम्रपान, शराब व नशीले पदार्थों का सेवन करने की वजह से मस्तिष्क पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाता है जिसके कारण बच्चा दिमागी रूप से कमजोर हो जाता है।


ए डी एच डी के लक्ष्ण | ADHD Symptoms in Hindi

1. अति सक्रियता के लक्षण:- अति सक्रियता के कारण बच्चो या वयस्कों को निरंतर समय तक बैठे रहने में परेशानी होती है और अधिक बोलना व बेचैन रहने के लक्षण रहते है।

2. लंबे समय तक ध्यान केंद्रित कर पाना:-अधिक समय तक ध्यान केंद्रित नहीं कर पाना ए डी एच डी से ग्रसित व्यक्तियों का विचलित होना, निर्देशों का पालन नहीं करना व दैनिक गति विधियों के बारे में भूलना और एक अधूरी गतिविधि से जल्दी ही दूसरी गतिविधि की ओर बढ़ना ए डी एच डी के लक्षण होते है।

ए डी एच डी का उपचार ए डी एच डी का उपचार निम्नलिखित है।

1. दवाओं से उपचार:- ए डी एच डी के उपचार या प्रभाव को कम करने के लिए दवाओं का सेवन कर सकते है, जिससे बच्चों व वयस्कों के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में सुधार किया जा सकता है।

2. मनोवैज्ञानिक चिकित्सक:- मनोवैज्ञानिक चिकिस्तक बच्चों और वयस्कों के व्यवहार में सुधार लाते है व बच्चों को दिमागी रूप से मजबूत भी बनाते है जिससे बच्चों की दैनिक गतिविधियों के बारे में भूलने को क्षमता में सुधार होता है

3. थेरेपी से उपचार :- थेरेपी के प्रयोग से ए डी एच डी के प्रभाव को कम किया जा सकता है इसमें सामाजिक शिक्षा का ज्ञान देना व्यवहार में बदलाव करना, नियमित ध्यान केंद्रित करना आदि, सिखाया जाता है।

4. योग व व्यायाम:- बच्चों को नियमित रूप से घर में ही योग व व्यायाम कराने से ए डी एच डी विकार को दूर किया जा सकता है। योग व व्यायाम से ध्यान केंद्रित होता है साथ मन विचलित होना और एक जगह बैठने की समस्या भी दूर होती हैं


युवाओं में ए डी एच डी की समस्या

युवाओं में ए डी एच डी की समस्या कम होती है लेकिन इसमें यह विकार युवाओं को सीखने, कार्य करने, ध्यान केंद्रित करने और व्यवहार क्षमता को प्रभावित कर देता है। ए डी एच डी से प्रभावित वयस्कों के लिए ध्यान या एकाग्रता बनाए रखने की समस्या मुख्य समस्या हो सकती है

ए डी एच डी के प्रकार

ए डी एच डी तीन प्रकार के होते है यह सभी तीनों प्रकार निम्नलिखित है।

1. ध्यनाभाव सम्बन्धी ए डी एच डी :- ध्यानाभाव ए डी एच डी से ग्रस्त व्यक्तियों को ध्यान केंद्रित करने से सम्बन्धित समस्या सामने आती है। इस विकार में अतिसक्रियता या सवेंगशील के लक्षण महसूस नहीं होते है।

2. अतिसक्रियता सम्बन्धी ए डी एच डी:- इस विकार से ग्रस्त व्यक्तियों को अतिसक्रियता और आवेग के लक्षण होते है। इसमें किसी को अगर ध्यनभाव के लक्षण भी सामने आते है तो यह मुख्य लक्षण नहीं होते है।

3. संयुक्त ए डी एच डी:- जब किसी व्यक्ति में ध्यनाभाव और अतिसक्रियता दोनों के लक्षण पाए जाते है तो उसे संयुक्त ए डी एच डी विकार कहते है।


वयस्क में ए डी एच डी की 10 परेशानियां

1. सड़क दुर्घटना और लापरवाही से गाड़ी चलाना :- ए डी एच डी के कारण व्यक्ति ध्यान लगाने में असमर्थ रहता है जिसके कारण ए डी एच डी से ग्रसित व्यक्ति को गाड़ी चलाने में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। इसकी वजह से सड़क दुर्घटना, तेजी से गाड़ी चलाने की घटना सामने आती है।

2. शादी सम्बन्धी परेशानी :- ए डी एच डी की वजह से शादी सम्बन्ध में गहरा असर पड़ता है क्यूंकि ए डी एच डी से ग्रसित व्यक्ति अपने साथी का ध्यान नहीं रख पाता है उनकी बात नहीं सुनता है, वह यह भी नहीं पहचान पाता है कि उसका साथी उदास है।

3. किसी की बात ना सुनना:- वयस्कों में ए डी एच डी के कारण उन्हें किसी की भी बात सुनने या ध्यान लगने की क्षमता कम हो जाती वह अधिक देर तक व्यापार या ऑफिस की मीटिंग को सुन नहीं पाते है या उनका ध्यान नहीं रहता है।

4. ध्यान का भटकना:- ए डी एच डी के कारण ध्यान केंद्रित ना कर पाने की की समस्या रहती है जिसके कारण वयस्कों की भाग दौड़ की जिंदगी में सफल होना मुश्किल हो जाता है। वयस्कों में ए डी एच डी के कारण ईमेल और फोन कॉल आने की वजह से उनका ध्यान भटक जाता है जिससे उन्हें अपना कार्य पूरा करना में परेशानी होती है।

5. आराम करने में परेशानी:- वयस्कों में ए डी एच डी से वह बेचैन रहते है या आराम करने में परेशानी आती है।

6. लेट होना:- लेट होने के कई कारण हो सकते है जैसे वयस्कों में ए डी एच डी की वजह से रास्ते में ध्यान भटक जाना या यह याद आना की गाड़ी को साफ करने की जरूरत है इसकी वजह से समय बर्बाद हो ता है और वह लेट हो जाते है। वयस्कों में ए डी एच डी विकार की वजह से उन्हें यह भी पता नहीं चल पाता है कि कार्य कितने समय बाद पूरा होगा चाहे वह बड़ा कार्य हो या छोटा कार्य।

7. भावना में नियंत्रण ना होना:- ए डी एच डी के कारण भावना पर नियंत्रण नहीं हो पाता है जिससे वयस्क जल्दी ही छोटी छोटी बातों पर गुस्सा आना या भावना पर नियंत्रण नहीं रख पाते है। कई बार उन्हें गुस्सा जितनी जल्दी आता उतनी ही जल्दी चला भी जाता है।

8. कार्य शुरू करने में परेशानी होना:- ए डी एच डी से ग्रसित वस्यको को कार्य शुरू में परेशानी आती है जिसमें अधिक ध्यान देने की जरूरत है। इस परेशानियों में शादी संबंधी में असहमति, दोस्तो के साथ परेशानी आदि शामिल हैं 

9. प्राथमिकता कार्य ना कर पाना:- इस विकार के कारण वयस्क अपने प्राथमिक कार्य को समय पर नहीं कर पाते है जिससे उन बड़े कर्तव्य नहीं मिल पाते है।

10. जिम्मेदारी ना लेना:- वयस्कों में जैसे बिल, नौकरी, आदि की जिम्मेदारी ना ले पाना की समस्या सामने आती है।


ए डी एच डी विकार के लिए डॉक्टर को दिखाना

यदि ए डी एच डी के कारण निम्नलिखित कारण है तो आपको डॉक्टर को दिखाना व सलाह लेना जरूरी है।

1. समान का ध्यान ना रखना :- चश्मा, बटुआ, फोन, गाड़ी की चाबी रख कर भूल जाना व दुबारा खोजने में समय व्यर्थ करना साथ ही बिल भरना, मेडिकल तारीख, किसी की कॉल का जवाब देना भूल जाते है यह सभी ए डी एच डी से ग्रसित व्यक्तियों के साथ होता है।

2. अधिक समय तक ध्यान केंद्रित ना कर पाना :-ए डी एच डी की वजह से ध्यान केंद्रित ना कर पाने की समस्या सामने आती है इस विकार से ग्रसित व्यक्ति अधिक समय तक ध्यान नहीं लगा पाता है। तनाव, चिंता और किसी प्रकार की लत के कारण भी ध्यान केंद्रित ना कर पाने की समस्या सामने आती है।

3. भावना का अनियंत्रित होना :- जल्दी गुस्सा आना, प्रेरित महसूस ना करना व मनोदशा का बदलना यह सभी भावना पर नियंत्रण रखना, ए डी एच डी से ग्रसित व्यक्तियो के लिए मुश्किल हो जाता है।


ए डी एच डी का उपचार किस स्वस्थ प्रदाता से होगा

1. मनोवैज्ञानिक के द्वारा :- मनोवैज्ञानिकों के पास ए डी एच डी से सम्बन्धित उपचार के लिए अनुभव होता है और यह विशेषज्ञ मूल्यांकन और थैरेपी की सलाह देते है।

2. नर्स के द्वारा:- नर्स बच्चो को ध्यान से रखने के लिए सभी प्रश्नों के जवाब देती है और ध्यान रखने वाली टीम के साथ सहयोग भी करती है।

3. सामाजिक कार्यकर्ता :- यह ए डी एच डी से ग्रसित व्यक्तियों और बच्चो को शिक्षा देना, सहयोग करना और कुछ उपाय की सलाह देते है।

4. मनोचिकित्सक:- यह मेडिकल डॉक्टर होते है जिन्हे ड्रग्स और दवाइयों के द्वारा ए डी एच डी का उपचार करने काअनुभव होता है।


ए डी एच डी के लिए बेहतर उपचार

डॉक्टर की सलाह पर दवाइयों का सेवन करने से ए डी एच डी का उपचार किया जा सकता है

1. उत्तेजक दवाईयां

ए डी एच डी के उपचार के लिए डॉक्टर की सलाह पर एंफेटामाइन और मेथेल्फेंडेट्स दोनों ही ध्यान केंद्रित ना कर पाने की समस्या को दूर करती है और मस्तिष्क में संकेत भेजने व प्राप्त करने में मदद करती है जिसकी वजह से व्यक्ति अच्छी तरह से सोच सकता है। यदि उत्तेजक दवाओं के कारण मुंह का सुखना, सिर में दर्द होना और अनिंद्रा जैसे दुष्प्रभाव होते है तो डॉक्टर की सलाह पर दवाओं में बदलाव भी कर सकते है।

2. गैर-उत्तेजक दवाईयां

जब उत्तेजक दवाईयां कार्य नहीं करती है या किसी व्यक्ति के लिए सही नहीं होती है तो डॉक्टर उन्हें गैर उत्तेजक दवाओं की सलाह देता है जैसे एटमॉक्सेटाइन दवा यहां मस्तिष्क में रसायन का स्तर बढ़ा देती है जिसके कारण व्यक्ति अपने व्यवहार में नियंत्रण रख सकता है। गैर उत्तेजक दवाईयां कुछ हफ्तों में अपना असर दिखाना शुरू करती है इस दवाओं के भी दुष्प्रभाव हो सकते है जैसे पेटमें जलन, कब्ज आदि।


वयस्कों में ए डी एच डी दवाओं का लंबे समय तक असर

ए डी एच दी दवाओं का असर लंबे समय तक रह सकता है यह सभी असर निम्नलिखित है।

1. उच्च रक्त चाप और हृदय संबंधी बीमारी

ए डी एच डी के उपचार के लिए कई उत्तेजक दवाईयां उच्च रक्तचाप और हृदय के स्तर को बढ़ा देती है यदि किसी व्यक्ति को पहले से ही हृदय की बीमारी है तो उन्हें यह उत्तेजक दवाईयां जोखिम साबित हो सकती है

2. अनियमित रूप से हृदय का धड़कना

एटमॉक्सेटाइन ए डी एच डी की गैर उत्तेजक दवा है जिसकी वजह से हृदय का अनियमित रूप से धड़कना जैसे समस्या सामने आती है। एफ डी ए के अनुसार जिन व्यक्तियों के साथ ऐसे बीमारियों का इतिहास है तो उन्हें इन दवाओं से दूर रहना चाहिए।


टिट्रेशन क्या होता है?

टिट्रेशन का अर्थ है कि डॉक्टर के साथ कार्य करते हुए बच्चो को दवाई देना और इसका उद्देश्य होता है कि दवाई की नियमित मात्रा को बनाना और बच्चो में ए डी एच डी के लक्षणों को नियंत्रित  करना। डॉक्टर यही सलाह देते है कि बच्चो को प्रत्येक 1 सप्ताह से 3 सप्ताह तक दवाई की मात्रा को थोड़ा सा बढ़ाना चाहिए।


ए डी एच डी के दुष्प्रभाव को कम करने के उपाय

ए डी एच डी के कई दुष्प्रभाव है जिन्हे दवाओं से कम किया जा सकता है।

1. मुंह का सूखना:- मुंह सूखने के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए तरल पदार्थों का अधिक सेवन करना, मीठी गोली का प्रयोग करना जिससे मुंह गीला रहेगा।

2. सिर में दर्द होना:- सिर में दर्द खाली पेट दवा लेने के कारण या निर्जलित होने के कारण होता है। डॉक्टर की सलाह पर दवा लेने पर यह दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।

3. मनोदशा का बदलना:- ए डी एच डी की दवाओं के कारण कई व्यक्तियों को तनाव और चंचल जैसे समस्या का सामना करना पड़ता है इस दुष्प्रभाव को कम करने व दूर करने के लिए वह डॉक्टर की सलाह पर अपनी दवाओं की मात्रा को बदल सकते है।


क्या बिना दवाओं से ए डी एच डी को नियंत्रित किया जा सकता है?

बिना दवाइयों से भी ए डी एच डी को नियंत्रित किया जा सकता है यह सभी उपाय निम्मलिखित है।

1. अध्यापक और पैरेंट्स की मदद से:- पैरेंट्स की मदद से ए डी एच डी को नियंत्रित किया जा सकता है उनका उद्देश्य यही होना चाहिए कि बच्चो को 10 से 15 मिनट तक डिनर मेज या अपने पास बैठा के रखे और अध्यापक बच्चे के व्यवहार का  उल्लेख रिपोर्ट कार्ड में करे।

2. सोने का समय:- आधा घंटा या एक घंटा अधिक नींद लेने की वजह से आराम करने और अतिसक्रियता जैसे समस्या को कम किया जा सकता है 

3. व्यायाम या शारीरिक गतिविधि:- प्रत्येक दिन आधा घंटा व्यायाम और शारीरिक गतिविधि करने से ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है। ए डी एच डी से ग्रसित छोटे बच्चो के लिए प्रत्येक दिन आधा घंटा खेलने की वजह से वह ध्यान केंद्रित कर पाते है।


ए डी एच डी कैसे संबंधो को प्रभावित करता है।

1. भूलने की शिकायत:- ए डी एच डी से ग्रसित व्यक्ति किसी का जन्मदिन, कार्य पूरा करने की तारीख आदि यह सभी याद या ध्यान नहीं रहता है जिसकी वजह से संबंध प्रभावित होते है

2. ध्यान भटकना :- अपने बच्चे के खेलने या ट्यूशन जाने के समय का ध्यान ना रखना, कॉल उठाने का ध्यान ना देना, कार्य से ध्यान भटकना यह सभी समस्या ए डी एच डी से ग्रसित व्यक्तियों के सामने आती है। जिससे संबंधों में गहरा असर पड़ता है।

3. गलतफहमी में रहना:- जब व्यक्ति शब्दों के पीछे छुपे भावना को समझ नहीं पाता जिसकी वजह से गलतफहमी और भावना को ठेस पहुंचती है यह सभी ए डी एच डी के कारण होता है जिससे संबंधों पर असर पड़ता है