फाइज़र वैक्सीन अपडेट

फाइज़र वैक्सीन अपडेट

फाइजर वैक्सीन की क्या है अपडेट्स

अमेरिका शुरु से ही कोविड वैक्सीन बनाने की दौड़ में सबसे आगे रहा है और इसी के चलते उन्होंने वैक्सीन बनाने को लेकर शुरु से ही तेजी दिखाई है जिसके चलते अब फाइज़र तैयार हो गई है । फाइजर पहली कंपनी  ऐसी थी जिसने कोरोना से लड़े जाने वाली जंग में जीत हासिल कर वैक्सीन तैयार की । 

भारत के लिए फाइजर की कोविड -19 वैक्सीन को प्रमाणित करने के लिए सरकार ने मंजूरी दे दी है । सरकार को इसके उच्च मूल्य टैग के कारण कोविड -19 संक्रमण को रोकने में 95 प्रतिशत प्रभावकारिता दिखाने के बावजूद भारत में वितरण के लिए फाइजर-बायोएनटेक के कोरोनावायरस वैक्सीन की खरीद की संभावना नहीं है  । फाइजर ने सोमवार को अमेरिका के 50 राज्यों में अपने फ्रीजर-पैक वैक्सीन परीक्षणों का पहला शिपमेंट शुरू किया । फाइजर ने सोमवार को अमेरिका के 50 राज्यों में अपने फ्रीजर-पैक वैक्सीन परीक्षणों का पहला शिपमेंट शुरू किया ।

हालिया अपडेट 

कोविड -19 की फाइजर वैक्सीन के बारे में मास “रियल वर्ल्ड” के अनुसार  अधध्यन में यह बात कही गई है की फाइजर वैक्सीन 94 % तक प्रभावी  पाई गई है । जिसमें इज़राइल में 1.2 मिलियन लोग शामिल थे, कोरोवायरस वायरस की महामारी को समाप्त करने के लिए बड़े पैमाने पर टीकाकरण अभियानों की शक्ति की पुष्टि की।न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित इज़राइली अध्ययन ने यह भी प्रदर्शित किया कि संक्रमण के खिलाफ एक मजबूत सुरक्षात्मक लाभ होने की संभावना है । 

अमेरिकी दवा कंपनी फाइजर का कोरोना टीका भी भारत में  इस्तेमाल हो सकेगा। पहली बार देश में सबसे कम तापमान पर टीका  सुरक्षित रखने की तैयारी चल रही है।यह तैयारी ज्यादातर देश के महानगरों में रहेगी और इन्हीं शहरों में फाइजर कंपनी के टीका का इस्तेमाल किया जा सकता है। दिल्ली सहित देश के कई महानगरों में कई माइनस तापमान पर टीका रखे जाने की व्यवस्था की जा रही है।
फाइजर कंपनी की ओर से देश में सबसे पहले आपातकालीन इस्तेमाल के लिए अनुमति मांगने का आवेदन सौंपा गया था। अभी इस आवेदन पर विचार चल रहा है। सरकार ने हाल ही में यह फैसला लिया है कि एक जिले में केवल एक कंपनी का टीका उपलब्ध कराया जाएगा। ताकि अगर कोई प्रतिकूल प्रभाव नजर आते हैं तो उस दिशा में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

फाइजर वैक्सीनेशन के बाद हुई एलर्जी 

हालांकि, ये वैक्सीन साइड इफेक्ट भी दिखा रही है लेकिन इस बार इसे एक डॉक्टर की मौत की वजह बताया जा रहा है। दरअसल, 3 जनवरी को अमेरिका के साउथ फ्लॉरिडा में एक 56 वर्षीय डॉक्टर की मौत हुई, अब उनकी पत्नी ने कहा है कि यह मौत फाइजर की कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक की वजह से हुई है।
स्वास्थ्य अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे हैं। डॉक्टर माइकल लगभग 10 साल से माउंट सिनाई मेडिकल सेंटर में काम कर रहे थे और जनवरी 3 तारीख को उनकी मौत हो गई। पत्नी हेदी नेकलमेन के मुताबिक, डॉक्टर माइकल को 18 दिसंबर को कोरोना वैक्सीन की पहली खुराक दी गई थी।
फाइजर ने कहा है कि उन्हें इस मामले की जांच की जानकारी है लेकिन कंपनी को यह नहीं लगता कि डॉक्टर की मौत का वैक्सीन से कोई लेना-देना है।

कब तक होगी उपलबद्ध :- 
95 % तक फाइजर असरदार बताया जा रहा है । कई जगहों पर इसकी वैक्सीनेशन की तैयारी की जा रही है 16 जनवरी तक इसके वैक्सीनेशन की आशंका जताई जा रही है । 
फाइजर से बात के दौरान यह बात कही है की COVAX और मॉडर्न के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने के साथ, इन दो टीकों की भारत और अन्य निम्न मध्यम आय वाले देशों (LMIC) में जनता के लिए उपलब्ध होने की संभावना जल्द ही वास्तविकता बन सकती है।

Mr. Girish Pandey

हिंदी और साहित्य विषयों में रुचि, इसके अतिरिक्त लेखन कार्य में सक्रिय और लगातार सीखने का इच्छुक । हिंदी कविता, लेख के अलावा ऊर्दू शायरी लिखने और पढ़ने का शौक । स्वास्थ्य संबंधी विषयों में रुचि विशेषकर आयुर्वेदा और नैचरोपैथी ।

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