डिप्रेशन के लक्षण | Depression ke Lakshan

डिप्रेशन के लक्षण | Depression ke Lakshan

तनाव, चिंता, घबराहट और बेचैनी, यह सब अवसाद यानि डिप्रेशन के ही लक्षण है, जिनका यदि सही समय पर इलाज न किया जाए तो यह कभी न कभी बाहर निकलकर सामने आ ही जाते हैं और परिणाम बहुत बुरा होता है,परंतु इन लक्षणों को कैसे पहचानें, यह एक ज़रुरी और चुनौतीपूर्ण सवाल है । भारत सरकार के एनसीबीआई विभाग में देश के अलग-अलग राज्यों में डिप्रेशन के स्तर को जांचने के लिए 2016 में एक सर्वे कराया जिसमें कईं बातें निकलकर सामने आईं ।



डिप्रैशन लक्षण

सर्वे को देखें तो न सिर्फ लोगों का प्रतिशत सामने आया बल्कि लक्षणों के बारे में भी जानकारी पता चली है –

किसी व्यक्ति द्वारा की जा रही बातों, हाव-भाव और उसकी सोच से उसके डिप्रैशन लेवल का अंदाज़ा लगाया जा सकता है ।यदि आपका कोई मित्र, रिश्तेदार या पड़ोसी निराश, हताश या उदासीनता के माहौल में है और जिसे स्वंय से घृणा या दोषी होने का भाव महसूस होता है, तो निश्चित तौर पर यह डिप्रैशन के ही लक्षण हैं ।ऐसे माहौल में व्यक्ति अक्सर-'मुझे स्वंय से नफरत है', 'सारी गलती मेरी है', 'मैं किसी काम का नहीं हूं', 'जिंदगी बेकार है', इस तरह की बातें करते हैं । अगर ऐसा है तो उनके साथ वक्त गुज़ारें और उनकी बातों को साझा करें । इस तरह की बातें अगर वे बार-बार करते हैं, तो उनके साथ बैठकर बातें साझा करें ।

व्यक्ति को अपने जीवन में जो भी करना पसंद है, डिप्रैशन धीरे-धीरे वह सब खत्म कर देता है । यदि आपको ऐसा आभास हो कि आपका मित्र या करीबी अब वह गतिविधियां नहीं कर रहा जो उसे पसंद थी या वह बहुत अधिक करता था, तो समझ लिजिए की उसके जीवन में कुछ गलत परिवर्तन हुए हैं और यह डिप्रैशन का ही शुरुआती लक्षण है ।

शरीर में ऊर्जा की कमी और थकान की कमी होना भी डिप्रैशन का ही लक्षण है । बहुत अधिक नींद आना या नींद का कम आना, यह दोनों डिप्रैशन के ही लक्षण हैं । यदि किसी व्यक्ति को हर वक्त ऐसा लगे कि वह थका हुआ है या उसका शरीर शक्तिहिन हो गया है तो यह डिप्रैशन का ही लक्षण है ।

दिल और दिमाग में लगातार भावनाओं का उमड़ना, जिन्हें काबू कर पाना मुश्किल हो जाता है, तो यह भी डिप्रैशन का ही संकेत है । एक पल को आप खुश हैं, वहीं दूसरे पल गुस्सा हो जाते हैं और तीसरे पल उदास होकर फिर खुश हो जाते हैं, तो इस तरह भावनाओं का जल्दी-जल्दी बदलना डिप्रैशन का लक्षण ही है । 

आत्मविश्वास की कमी, स्वंय पर भरोसा न होना भी डिप्रैशन ही है । यह डिप्रैशन ही है जब आप स्वंय पर इतना भरोसा नहीं कर पाते कि आप कोई कार्य स्वंय भी कर सकते हैं और इसी से धीरे-धीरे आपके मन मस्तिष्क में यह भावना घर कर जाती है कि आप बेकार हैं, किसी काम के नहीं है । डिप्रैशन से घिरे हुए लोग खुद को और खुद के भविष्य को लेकर सिर्फ नकारात्मक भावना रखते हैं ।