दिल के रोगियों को कोरोना वायरस से अधिक खतरा क्यों है ?

दिल के रोगियों को कोरोना वायरस से अधिक खतरा क्यों है ?

भारत में कोरोना बड़े व्यापक स्तर पर फैल चुका है । इस वक्त देश में कोरोना से लगभग 6 हज़ार लोग संक्रमित हो चुके हैं, 400 लोगों ने रिकवर किया है जबकि 170 लोगों की मौत हो चुकी है । 

लोगों में कोरोना वायरस के प्रति जहां जागरुकता है वहीं इसके प्रकोप को देखते हुए भय का माहौल भी है और इसी के चलते बहुत सारे सवाल और मिथक भी हैं । इन्ही में से एक सवाल है ?

इस प्रश्न का उत्तर देते हुए डॉ. के.के.अग्रवाल, अध्यक्ष, हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया ने कहा – यह कहीं हद तक सच है कि हार्ट पेशेंट में दूसरे लोगों के मुकाबले कोरोना वायरस का खतरा अधिक है और इसीलिए उन्हें सावधानी भी दूसरे लोगों से अधिक बरतने की ज़रुरत है । 

इस बारे में आगे बताते हुए डॉ.अग्रवाल ने कहा कि – हमारे शरीर में हर जगह चाहे वो दिल हो या फेफड़ें, हर जगह एस्टोरिसेप्टर्स होते हैं इसलिए यह वायरस इन दो भागों को पर आक्रामक होता है और जिनको पहले से ही ह्रदय संबंधी रोग हो उन्हें ये ज्यादा दिक्कत देगा । 

क्या खतरा है ?

माइकाडाइटिस कर सकता है जैसे रुमेटिक माइकाटाइटिस होती है । इसका मतलब है कि हमारा दिल ज़रुरत और समय से पहले थक जाएगा । यदि कुछ काम आ जाए तो दिल पहले ही थका हुआ महसूस करेगा ।

हमारी पम्पिंग रिएक्शन कम हो सकती है यानि दिल जिस गति के धड़कता है, उसमें कमी आ सकती है ।

अचानक हार्ट अटैक हो सकता है ।

अचानक क्लोटिंग हो सकती है यानि थक्का लग सकता है ।आजकल यह भी कहा जा रहा है कि क्लोटिंग वाले मामलों में थ्रोम्बोलाइसिस कर सकते हैं क्योंकि अगर फेफड़ों या दिल में क्लोटिंग यानि खून जमा हुआ है तो वह इससे ठीक हो जाएगा । काफी रोगियों को हार्ट अटैक हो रहे हैं, एक मरीज़ की रिकवर होने के बाद भी हार्ट अटैक के कारण मृत्यु हो गई ।

इसका मतलब यही निकल के आ रहा है कि कहीं न कहीं ये कोरोना वायरस हमारे शरीर में क्लोटिंग फिलोस्फी लेकर आ रहा है यानि इससे पीड़ित रोगी के फेफड़ों और दिल में खून का जमाव हो रहा है । 

इसको लेकर एक नया ट्रायल शुरु हुआ है जो टीपीए का है, जिसका अर्थ है कि ह्रदय रोगियों को टीपीए दें और अगर किसी को हार्ट अटैक हो जाता है तो उसका सबसे बेहतर इलाज टीपीए या सैप्टोकाइनस है ।इसके बाद फिर एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के साथ इसका पालन करें।

आंकड़ों पर ध्यान दें तो कोरोना वायरस की चपेट में आने वाले ज्यादातर लोग दिल की बीमारी के शिकार थे। असल में दिल के रोगियों में से 50 प्रतिशत रोगी ऐसे हैं जो डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की बीमारी से पीड़ित हैँ। इसके अलावा 10प्रतिशत लोग धूम्रपान करते हैं। ऐसे में एक रिसर्च की मानें तो 1लाख जनसंख्या में से लगभग 6 हजार लोग दिल से जुड़ी हुई बीमारियों के शिकार है। ऐसे में इन्हें अपना खास ख्याल रखना चाहिए। 

जिन लोगों के दिल की नसें या ट्यूब कमजोर हो चुकी हैं यानी वे मायोकार्डियल इनज्यूरी से ग्रस्त हों, उनमें कोरोनाकी वजह से मौत होने की सबसे अधिक संभावना बताई गई है। ऐसे लोगों में मृत्यु दर 60फीसदी देखी गई है। 

दिल के नलियों के कमजोर होने से दिल और खून के बीच प्रवाह कम हो जाता है और हार्ट अटैक का खतरा होता है। शिकागो की नार्थवेस्ट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने वुहान के दो अस्पतालों में रोगियों की मौत के आंकड़ों को देखते हुए यह परिणाम निकाला है।

ट्रपोनिन प्रोटीन की जांच करके इस बीमारी का पता लगाया गया । दो अलग-अलग अस्पतालों के आंकड़ों देखे गए और इसमें दोनों नतीजे एक जैसे निकले । एक अस्पताल में भर्ती 400कोरोना पॉजीटिव रोगियों की जांच की गई, इनमें से 82 यानी करीब लगभग 20फीसदी मरीज़ ऐसे थे जो ह्रदय संबंधी रोगों से जूझ रहे थे । खून में ट्रपोनिन प्रोटीन की जांच से इस बीमारी का पता लगाया जाता है।

कोरोना का दिल संबंधी मरीजों पर जो असर हो रहा है वह वास्तव में चिंता वाला सवाल है । शोधकर्ताओं ने कहा है कि इस बात की पूरी जांच होनी चाहिए कि कहीं कोरोना के संक्रमण से दिल को नुकसान तो नहीं पहुंच रहा हैं।

डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे शोध के अनुसार जो लोग अस्थमा, डायबिटीज और दिल संबंधी रोगों से पीड़ित हैं ऐसे मामलों में कोरोना थोड़ा अधिक हावी हो जाता है। आजकल के माहौल के अनुसार जिन लोगों की उम्र 60 पार है, उन सभी लोगों में इन रोगों की संभावना बहुत अधिक होती हैं। ऐसे में आवश्यक है कि घर के बड़े-बुज़ुर्गों की विशेष देखभाल की जाए।  हमारे देश में इस समय लगभग 50लाख से ज्यादा बुजुर्ग हैं ।

बच्चों से दूर रहें 

अस्थमा,डायबिटीज या दिल की बीमारी से पीड़ित बड़े-बुज़ुर्गों को इस समय घर के बच्चों से विशेष तौर पर दूर रहना है क्योंकि बच्चे अक्सर इधर-उधर रहते हैं और बुज़ुर्गों में रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी होती है, ऐसे में वायरल या फ्लू होने का खतरा अधिक है ।

क्या करें ?

अगले कुछ दिन सेल्फ आइसोलेशन यानि अलग रहने का अभ्यास करें। (हम जानते हैं कि इस उम्र में यह कर पाना आसान नहीं है परंतु इस वक्त सोशल डिस्टेंसिंग ही एकमात्र उपाय है।)

बच्चों से भी खुद को दूर रखिए। 

जितना हो सके संतुलित आहार लें और घर पर योगा या हल्का व्यायाम करें, दवाइयां समय पर लेंते रहें । 

क्या न करें?

अपनी दिनचर्या को बदलें, सुबह और शाम टहलने के लिए न निकलें । 

यदि सर्दी, बुखार या खांसी जैसे लक्षण दिखें तो उसे इग्नोर न करें। 

रुटिन चैक-अप के लिए अस्पताल जानें से बचें, अस्पतालों में रुटिन चैक-अप फिलहाल बंद कर दिए गए हैं । 

अपने डॉक्टर से फोन पर या विडियो कॉन्फ्रैंसिंग द्वारा ही संपर्क साधें । 

Dr. KK Aggarwal

Recipient of Padma Shri, Vishwa Hindi Samman, National Science Communication Award and Dr B C Roy National Award, Dr Aggarwal is a physician, cardiologist, spiritual writer and motivational speaker. He is the Past President of the Indian Medical Association and President of Heart Care Foundation of India. He is also the Editor in Chief of the IJCP Group, Medtalks and eMediNexus

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