अल्जाइमर रोग क्या है? विस्तार से जाने | Alzheimers Disease in Hindi

हम सभी लोग कुछ न कुछ भूल ही जाते हैं, चाहे वो कोई बात हो, कहीं कोई चीज़ रखी हो और सबसे ज्यादा परीक्षा देते हुए उत्तर. अगर आप बस कुछ ही बातें भूलते हैं तो यह सामान्य बात है. लेकिन अगर आप अक्सर ही सभी जरूरी और गैर जरूरी बाते भूल जाते हैं तो यह बात गंभीर है और इसका मतलब कहीं आप अल्जाइमर से तो नहीं? अल्जाइमर एक दिमागी बीमारी हैं जिसे आम भाषा में भूलने की बीमारी भी कहा जाता है. तो चलिए इस लेख के जरिये इस दिमागी बीमारी के बारे में विस्तार से जानते हैं.  

अल्जाइमर रोग क्या है? What is Alzheimers disease?

अल्जाइमर रोग मनोभ्रंश (dementia) का एक प्रगतिशील रूप है। मनोभ्रंश उन स्थितियों के लिए एक व्यापक शब्द है जो स्मृति, सोच और व्यवहार को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं। यह परिवर्तन दैनिक जीवन में कठिनाइयाँ पैदा करते हैं जो कि सामान्य से लेकर गंभीर तक हो सकती है. अल्जाइमर रोग वैसे तो उम्र के किसी भी दौर में हो सकता है, लेकिन इसकी होने की आशंका 60 वर्ष के बाद ज्यादा होती है. दुनिया भर में मनोभ्रंश यानि डिमेंशिया से लगभग 5 करोड़ ज्यादा लोग पीड़ित हैं और इन लोगों से में से करीब 60 से 70 प्रतिशत के बीच अल्जाइमर रोग होने का अनुमान है। बीमारी के शुरुआती लक्षणों में हाल की घटनाओं या बातचीत को भूलें की समस्या होती है। जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती है, अल्जाइमर रोग से पीड़ित व्यक्ति की याददाश्त कमजोर हो जाती है और वह रोजमर्रा के कार्यों को करने की क्षमता खो देता है। इस दिमागी बीमारी की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह लगातार प्रगति करती है और इसका कोई उपचार भी मौजूद नहीं है. हाँ, लेकिन कुछ खास उपायों और कुछ दवाओं की मदद से इसके आगे बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है.

अल्जाइमर रोग से जुड़े कुछ रोचक तथ्य। Some interesting facts related to Alzheimers disease.

अल्जाइमर रोग हाल के कुछ वर्षों में बहुत ही आम बन गया है, लेकिन लोग इससे जुड़े खास तथ्यों के बारे में नहीं जानते. तो चलिए अल्जाइमर से जुड़े नीचे लिखे कुछ खास तथ्यों के बारे में जानते हैं :-

  1. अल्जाइमर रोग एक क्रोनिक डिजीज है इसका मतलब है कि यह व्यक्ति को कई साल पहले हो जाती है, लेकिन इसके लक्षण उम्र बढ़ने के साथ ही दिखाई देते हैं.

  2. अल्जाइमर और डिमेंशिया एक ही चीज नहीं हैं। अल्जाइमर रोग एक प्रकार का मनोभ्रंश है।

  3. अल्जाइमर के लक्षण बहुत ही धीरे-धीरे सामने आते हैं और इसका मस्तिष्क पर अपक्षयी प्रभाव पड़ता है. इसका मतलब है कि मस्तिष्क के काम में धीमी गति से गिरावट आना.

  4. अल्जाइमर रोग किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों को इसके लिए अधिक जोखिम होता है। इसमें 65 वर्ष से अधिक आयु के लोग और इस स्थिति के पारिवारिक इतिहास वाले लोग शामिल हैं।

  5. एक शोध के अनुसार पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को अल्जाइमर होने का ज्यादा खतरा रहता है. 

  6. अल्जाइमर से अभी तक एक भी ऐसा मामला सामने नहीं आया है जिसकी वजह से व्यक्ति को जान का खतरा हो. हाँ, यह दिमागी बीमारी मृत्यु तक साथ रहती है.

  7. अल्जाइमर का अभी तक कोई इलाज नहीं है, लेकिन उपचार रोग की प्रगति को धीमा करने में मदद कर सकता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार कर सकता है।

  8. हर व्यक्ति को अल्जाइमर रोग होने का अलग कारण होता है और यह सभी लोगों में अलग ढंग से बढ़ सकता है.  

  9. अल्जाइमर रोग एक महँगी बीमारी है क्योंकि इसका उपचार करना काफी खर्चीला होता है.

  10. दिल और दिमाग का आपस में निकटता से संबंधित हैं. शायद इसी कारण से हृदय रोगियों को अल्जाइमर होने का खतरा बना रहता है. खासकर जो हृदय रोगी उच्च रक्तचाप, उच्च कोलेस्ट्रॉल स्तर, और मधुमेह से जूझ रहे हैं उन्हें इसका खतरा रहता है. इसके अलावा अगर हृदय रोगी एक खराब जीवनशैली और उचित आहार या दवाएं नहीं लेता उन्हें भी अल्जाइमर होने का खतरा बना रहता है. क्योंकि हृदय रोग की वजह से मस्तिष्क तक सही मात्रा में ऑक्सीजन युक्त रक्त नहीं पहुँच पाता.

अल्जाइमर रोग के लक्षण क्या है? What are the symptoms of Alzheimers disease?

भूलने की समस्या या कमजोर याददाश्त अल्जाइमर रोग की सबसे बड़ी पहचान है, लेकिन इस गंभीर दिमागी बीमारी का यह एकलौता लक्षण या पहचान नहीं है. इसके अतिरिक्त भी अल्जाइमर रोग होने पर कई तरह के लक्षण दिखाई देते हैं जो कि समय के साथ बदलते रहते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि जैसे-जैसे अल्जाइमर रोग बढ़ता है वैसे-वैसे मस्तिष्क में बदलाव होते रहते हैं, जिसकी वजह से व्यक्ति में कई बदलाव होने लगते हैं जिसे लक्षणों के तौर पर देखा जाता है. तो चलिए अल्जाइमर के लक्षणों के बारे में जानते हैं :- 

याददाश्त कमजोर होना Memory loss

हम अक्सर कोई न कोई चीज़ भूल जाते हैं, लेकिन अल्जाइमर वालों के साथ यह सामान्य है और इससे उन्हें जीवन पर भी बुरा असर पड़ता है. अल्जाइमर से जूझ रहे लोगों को निम्नलिखित समस्याएँ सामान्य रूप से हो सकती है :-

  1. बार-बार बातों और प्रश्नों को दोहराने की आदत, ताकि उन्हें वह बात याद रहे.

  2. हाल में की गई बात भूल जाना.

  3. चीज़े रख कर भूल जाना और फिर न मिलने पर गुस्सा आना या ब्लड प्रेशर हाई होना.

  4. जानी-पहचानी जगहों में खो जाना.

  5. रोजमर्रा की वस्तुओं और करीबी लोगों के नाम भूल जाना.

  6. वस्तुओं की पहचान करने, विचार व्यक्त करने या बातचीत में भाग लेने के लिए सही शब्द खोजने में परेशानी होना.

  7. कमजोर याददाश्त की वजह से लोगों से घुलने मिलने में परेशानी होना.

सोच और तर्क की समस्या होना Having problems with thinking and reasoning

अल्जाइमर रोग ध्यान केंद्रित करने और सोचने में कठिनाई का कारण बनता है, विशेष रूप से इसमें अमूर्त अवधारणाओं (abstract concepts) (जैसे संख्याओं) से जुड़ी समस्याएँ ज्यादा होती है। अल्जाइमर रोग होने पर मल्टीटास्किंग विशेष रूप से कठिन है, और वित्त प्रबंधन, बैलेंस चेकबुक और समय पर बिलों का भुगतान करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। आखिरकार, अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति संख्याओं को पहचानने और उनसे निपटने में असमर्थ हो सकता है। 

निर्णय और फैसले लेने में समस्या होना Having trouble making decisions and decisions

अल्जाइमर रोग रोजमर्रा की स्थितियों में उचित निर्णय लेने और फैसले लेने की क्षमता में गिरावट का कारण बनता है। उदाहरण के लिए, एक व्यक्ति सामाजिक बातचीत में खराब या अस्वाभाविक विकल्प चुन सकता है या ऐसे कपड़े पहन सकता है जो मौसम के लिए अनुपयुक्त हों। रोज़मर्रा की समस्याओं का प्रभावी ढंग से जवाब देना अधिक कठिन हो सकता है, जैसे कि चूल्हे पर खाना जलना या अप्रत्याशित ड्राइविंग की स्थिति।

परिचित कार्यों की योजना बनाना और प्रदर्शन करने में दिक्कत होना Difficulty planning and performing familiar tasks 

अल्जाइमर होने पर रोजमर्रा के कार्य करने और उनकी योजना बनाने में काफी समस्या होना शुरू हो जाती है. जैसे खाना बनाना, कोई पसंदीदा काम करने में, खेलने में, और घर की सफाई जैसे छोटे-मोटे काम करना संघर्ष जैसा बन जाता है. इसी के साथ-साथ अल्जाइमर रोग जैसे-जैसे बढ़ता है वैसे-वैसे यह समस्याएँ बढ़ने लग जाती है. कई बार तो रोगी को नहाने, कपड़े पहनने जैसी चीजों में भी समस्याएँ होने लग जाती है.

व्यक्तित्व और व्यवहार में परिवर्तन दिखाई देना Visible changes in personality and behaviour

अल्जाइमर से जूझने वाले व्यक्ति के मस्तिष्क में लगातार हो रहे बदलावों के कारण उनके व्यक्तित्व और व्यवहार में लगातार परिवर्तन दिखाई देता है. व्यक्ति को निम्नलिखित समस्याएँ हो सकती है :-

  1. अवसाद

  2. उदासीनता

  3. समाज से दूरी बनाना

  4. मिजाज़

  5. दूसरों पर अविश्वास

  6. चिड़चिड़ापन और आक्रामकता

  7. सोने की आदतों में बदलाव

  8. आवारागर्द

  9. अवरोधों का नुकसान

  10. भ्रम, जैसे कि विश्वास करना कि कुछ चोरी हो गया है 

अल्जाइमर रोग के कारण क्या है? What is the cause of Alzheimers disease?

अल्जाइमर रोग के सटीक कारणों को पूरी तरह से समझा नहीं गया है। लेकिन बुनियादी स्तर पर, मस्तिष्क में प्रोटीन सामान्य रूप से कार्य करने में विफल हो जाने पर मस्तिष्क कोशिकाएं (न्यूरॉन्स) ठीक से काम नहीं कर पाती क्योंकि उनके काम में बाधा आ जाती है. इस के साथ मस्तिष्क में प्रोटीन की वजह से विषाक्त घटनाएं (toxic events) की  श्रृंखला होने लग जाती है. इन दोनों की वजह से न्यूरॉन्स क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, एक दूसरे से संबंध खो देते हैं और अंततः मर जाते हैं।

वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि अधिकांश लोगों के लिए, अल्जाइमर रोग आनुवंशिक, जीवन शैली और पर्यावरणीय कारकों के संयोजन के कारण होता है जो समय के साथ मस्तिष्क को प्रभावित करते हैं। लेकिन इसके भी बहुत कम साक्ष्य है जो कि इस कथन की पुष्टि कर सके कि यह एक अनुवांशिक रोग है.

अल्जाइमर रोग की शुरुआत अक्सर मस्तिष्क के उस क्षेत्र से होना शुरू होती है जो कि स्मृति को नियंत्रत में रखने का काम करती है, इसी कारण से इस बीमारी में सबसे ज्यादा याददाश्त से जुड़ी समस्याएँ होती है. न्यूरॉन्स का नुकसान मस्तिष्क के अन्य क्षेत्रों में कुछ हद तक अनुमानित पैटर्न में फैलता है। रोग के अंतिम चरण तक, मस्तिष्क काफी सिकुड़ गया है।

अल्जाइमर होने के जोखिम कारक क्या है? What are the risk factors for getting Alzheimers? 

फ़िलहाल तक अल्जाइमर होने के सटीक कारणों के बारे में कोई जानकारी नहीं है, लेकिन ऐसे कुछ कारक जरूर है जो कि इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं. अल्जाइमर होने के पीछे के कुछ खास जोखिम कारक निम्न वर्णित किये गये हैं :-

उम्र Age 

बढ़ती उम्र अल्जाइमर रोग के लिए सबसे बड़ा ज्ञात जोखिम कारक है। अल्जाइमर सामान्य उम्र बढ़ने का हिस्सा नहीं है, लेकिन जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं अल्जाइमर रोग विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है।

पारिवारिक इतिहास और आनुवंशिकी Family history and genetics

यदि आपके माता-पिता या भाई-बहन को यह बीमारी है, तो आपको अल्जाइमर होने का खतरा कुछ अधिक होता है। परिवारों के बीच अल्जाइमर के अधिकांश अनुवांशिक तंत्र काफी हद तक अस्पष्ट रहते हैं, और अनुवांशिक कारक संभावित रूप से जटिल होते हैं। लेकिन फ़िलहाल इस बारे में कोई पुष्ट जानकारी नहीं है कि क्या सच में अल्जाइमर एक अनुवांशिक रोग है या नहीं.

डाउन सिंड्रोम Down Syndrome

जो लोग डाउन सिंड्रोम से जूझ रहे हैं उन्हें अल्जाइमर होने का खतरा काफी रहता है.

लिंग Gender

पुरुषों और महिलाओं के बीच जोखिम में थोड़ा अंतर प्रतीत होता है, लेकिन कुल मिलाकर, महिलाओं में यह बीमारी अधिक होती है क्योंकि वह आम तौर पर पुरुषों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहती हैं।

हल्का संज्ञानात्मक क्षीणता Mild cognitive impairment

हल्की संज्ञानात्मक हानि (एमसीआई) स्मृति या अन्य सोच कौशल में गिरावट आना है जो कि किसी व्यक्ति की उम्र के लिए सामान्य से अधिक है, लेकिन गिरावट किसी व्यक्ति को सामाजिक या कार्य वातावरण में कार्य करने से नहीं रोकती है। जो लोग हल्की संज्ञानात्मक हानि (एमसीआई) से जूझ रहे हैं उन्हें डिमेंशिया होने का खतरा रहता है. जिन लोगों के पास एमसीआई है, उनमें मनोभ्रंश विकसित होने का एक महत्वपूर्ण जोखिम होता है। जब हल्की शुरुआत में हल्की संज्ञानात्मक हानि (एमसीआई) की कमी स्मृति होती है, तो अल्जाइमर रोग के कारण स्थिति के डिमेंशिया होने की संभावना अधिक होती है। हल्की संज्ञानात्मक हानि का निदान स्वस्थ जीवन शैली में बदलाव, स्मृति हानि के लिए रणनीति विकसित करने और लक्षणों की निगरानी के लिए नियमित चिकित्सक नियुक्तियों को निर्धारित करने पर अधिक ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रोत्साहित करता है। 

सिर में चोट लगना Head injury

जिन लोगों के सिर में गंभीर चोट लगी है, उनमें अल्जाइमर रोग का खतरा अधिक होता है। कई बड़े अध्ययनों में पाया गया कि 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों में जिन्हें दर्दनाक मस्तिष्क की चोट (traumatic brain injury - TBI) थी, उनमें मनोभ्रंश यानि डिमेंशिया और अल्जाइमर रोग का खतरा बढ़ा है। अधिक-गंभीर और एकाधिक TBI वाले लोगों में जोखिम बढ़ जाता है। कुछ अध्ययनों से संकेत मिलता है कि टीबीआई के बाद पहले छह महीनों से दो साल के भीतर जोखिम सबसे बड़ा हो सकता है।

वायु प्रदुषण Air pollution

जानवरों के अध्ययन ने संकेत दिया है कि वायु प्रदूषण के कण तंत्रिका तंत्र के अध: पतन (degeneration of the nervous system) को गति दे सकते हैं। इसके अलावा मानव अध्ययनों में पाया गया है कि वायु प्रदूषण का जोखिम - विशेष रूप से यातायात निकास और जलती हुई लकड़ी से अधिक मनोभ्रंश जोखिम से जुड़ा है।

अत्यधिक शराब का सेवन Excessive alcohol consumption

लंबे समय से ज्यादा मात्रा में शराब पीने से मस्तिष्क में परिवर्तन होता है। कई बड़े अध्ययनों और समीक्षाओं में पाया गया कि शराब के सेवन संबंधी विकार मनोभ्रंश के बढ़ते जोखिम से जुड़े थे, विशेष रूप से शुरुआती शुरुआत में मनोभ्रंश।

सोने का गलत तरीका wrong way to sleep

शोध से पता चला है कि अगर आप गलत तरीके से सोते हैं, गलत समय पर सोते हैं या नींद से जुड़ी अन्य बुरी आदतों के आदि है तो इसकी वजह से आपको अल्जाइमर की समस्या हो सकती है. क्योंकि आप कभी भी अपनी नींद पूरी नहीं कर पाते जिसकी वजह से मस्तिष्क पर बुरे असर पड़ने शुरू हो जाते हैं.

जीवन शैली और हृदय स्वास्थ्य Lifestyle and heart health 

शोध से पता चला है कि हृदय रोग से जुड़े वही जोखिम कारक अल्जाइमर रोग के जोखिम को भी बढ़ा सकते हैं। इसमें शामिल है:

  1. व्यायाम की कमी

  2. मोटापा

  3. धूम्रपान या सेकेंड हैंड धुएं के संपर्क में आना

  4. उच्च रक्त चाप

  5. उच्च कोलेस्ट्रॉल

  6. खराब नियंत्रित टाइप 2 मधुमेह

अल्जाइमर रोग के कितने चरण है? How many stages does Alzheimers disease have? 

अल्जाइमर एक प्रगतिशील बीमारी है, जिसका अर्थ है कि समय के साथ लक्षण धीरे-धीरे बढ़ेंगे। इस दिमागी बीमारी के सात मुख्य चरण हैं जिन्हें निचे वर्णित किया गया है 

चरण 1 से 3 : पूर्व-मनोभ्रंश और हल्के संज्ञानात्मक हानि Pre-dementia and mild cognitive impairment

स्टेज 1 - इस स्तर पर कोई लक्षण नहीं होते हैं। यदि आप ऐसे परिवार से सबंध रखते हैं जहाँ अल्जाइमर का पारिवारिक इतिहास है और आपको इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं दे रहे हैं, तो आपको स्वस्थ उम्र बढ़ने की रणनीतियों के बारे में डॉक्टर से बात करनी चाहिए.

स्टेज 2 - सबसे पहले लक्षण दिखाई देते हैं, जैसे भूलने की बीमारी।

चरण 3 - हल्की शारीरिक और संज्ञानात्मक हानियाँ प्रकट होने लगती हैं, जैसे कि स्मृति और एकाग्रता में कमी। नए कौशल सीखना कठिन हो सकता है। यह परिवर्तन इतने हल्के और मामूली होते हैं जिसे केवल कोई करीबी व्यक्ति ही नोटिस कर सकता है.

चरण 4 से 7 : मनोभ्रंश Dementia

स्टेज 4 - अल्जाइमर का अक्सर इस स्तर पर निदान किया जाता है, लेकिन इसे अभी भी हल्का माना जाता है। स्मृति हानि को नोटिस करना और रोजमर्रा के कार्यों को प्रबंधित करने में कठिनाई होना आम है।

चरण 5 - मध्यम से गंभीर लक्षणों के लिए प्रियजनों या देखभाल करने वालों की मदद की आवश्यकता होती है. यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है कि दैनिक जरूरतों को पूरा किया जा रहा है, जैसे कि भोजन करना और घर का प्रबंधन करना।

चरण 6 - इस स्तर पर, अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति को खाने, कपड़े पहनने और शौचालय जैसे बुनियादी कार्यों में मदद की आवश्यकता होगी।

स्टेज 7 - यह अल्जाइमर का सबसे गंभीर और अंतिम चरण है। आमतौर पर बोलने और चेहरे के भावों का प्रगतिशील नुकसान होता है। इस चरण में व्यक्ति बिलकुल दुसरे व्यक्ति पर निर्भर होने लगता है.

जैसे-जैसे कोई व्यक्ति इन चरणों में आगे बढ़ता है, उसे अपने देखभाल करने वालों से बढ़ते समर्थन की आवश्यकता होगी। 

अल्जाइमर रोग का निदान कैसे किया जाता है? How is Alzheimers disease diagnosed?

किसी व्यक्ति को अल्जाइमर रोग का निदान करने का एकमात्र निश्चित तरीका मृत्यु के बाद उनके मस्तिष्क के ऊतकों की जांच करना है। लेकिन एक डॉक्टर आपकी मानसिक क्षमताओं का आकलन करने, मनोभ्रंश (dementia) का निदान करने और अन्य स्थितियों से इंकार करने के लिए अन्य परीक्षाओं और परीक्षणों का उपयोग कर सकता है।

डॉक्टर अल्जाइमर का निदान करने के दौरान आपसे आपके इतिहास के बारे में कई सवाल कर सकते, जैसे :-

  1. अल्जाइमर से जुड़े लक्षण

  2. परिवार के मेडिकल इतिहास की जानकारी

  3. अन्य वर्तमान या पिछली स्वास्थ्य स्थितियां

  4. वर्तमान में या बीते समय में ली गई दवाएं

  5. आहार, शराब का सेवन, और अन्य जीवन शैली की आदतें

इन सवालों के जवाब मिलने के बाद डॉक्टर को आगे की जांच करने में सहायता मिलती है कि उन्हें अब आगे कौन सी जांच करवानी है, और क्या आपके द्वारा बताई गई जानकारी अल्जाइमर होने की ओर पुष्टि या इशारा करती है या नहीं. इसके बाद ही डॉक्टर अल्जाइमर जांच के लिए आगे बढ़ता है.

अल्जाइमर परीक्षण Alzheimers test

अल्जाइमर रोग के लिए कोई निश्चित परीक्षण या जाँच नहीं है। हालांकि, मानसिक, शारीरिक, न्यूरोलॉजिकल और इमेजिंग परीक्षण आपके डॉक्टर को निदान तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं। आपका डॉक्टर मानसिक स्थिति परीक्षण से शुरू कर सकता है। इससे उन्हें आपका आकलन करने में मदद मिल सकती है:

  1. अल्पकालिक स्मृति

  2. दीर्घकालीन स्मृति

  3. स्थान और समय के लिए अभिविन्यास

उदाहरण के लिए, आपके डॉक्टर आपसे पूछ सकते हैं कि –

  1. यह कौन सा दिन है

  2. राष्ट्रपति कौन है

  3. शब्दों की एक छोटी सूची को याद रखने और याद करने के लिए

इसके बाद, आपके डॉक्टर संभवतः एक शारीरिक जांच करेंगे। शारीरिक जांच में डॉक्टर आपकी निम्नलिखित जांच कर सकते हैं :-

  1. रक्तचाप की जांच 

  2. हृदय गति का आकलन करें

  3. तापमान की जांच करें

  4. कुछ मामलों में मूत्र या रक्त परीक्षण की सलाह दें 

आपका डॉक्टर अन्य संभावित निदानों, जैसे कि संक्रमण या स्ट्रोक जैसे गंभीर चिकित्सा गंभीरता को ध्यान में रखते हुए एक न्यूरोलॉजिकल जांच (neurological examination) भी करवाने की सलाह दे सकते हैं। इस जांच के दौरान, आपकी आपकी जाँच करेंगे :-

  1. सजगता

  2. मांसपेशी टोन

  3. भाषण

आपका डॉक्टर मस्तिष्क इमेजिंग अध्ययन का आदेश भी दे सकता है। इन जांचों में निम्नलिखित शामिल है :-

  1. चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग (एमआरआई) स्कैन Magnetic resonance imaging (MRI) scan :- एमआरआई सूजन, रक्तस्राव और संरचनात्मक मुद्दों जैसे प्रमुख मार्करों को लेने में मदद कर सकते हैं।

  2. कंप्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी) स्कैन Computed tomography (CT) scan :- सीटी स्कैन एक्स-रे चित्र लेते हैं, जो आपके डॉक्टर को आपके मस्तिष्क में असामान्य विशेषताओं को देखने में मदद कर सकते हैं।

अन्य परीक्षण जो आपके डॉक्टर कर सकते हैं उनमें जीन की जांच के लिए रक्त परीक्षण शामिल हैं जो यह संकेत दे सकते हैं कि आपको अल्जाइमर रोग का उच्च जोखिम है।

अल्जाइमर रोग का उपचार कैसे होता है? How is Alzheimers disease treated?

वर्तमान समय में अल्जाइमर दवाएं स्मृति लक्षणों और अन्य संज्ञानात्मक परिवर्तनों (cognitive changes) के साथ कुछ समय के लिए मदद कर सकती हैं। संज्ञानात्मक लक्षणों (cognitive symptoms) के उपचार के लिए वर्तमान में दो प्रकार की दवाओं का उपयोग किया जाता है:


चोलिनेस्टरेज़ अवरोधक Cholinesterase inhibitor :-

यह दवाएं एक रासायनिक संदेशवाहक को संरक्षित करके सेल-टू-सेल संचार के स्तर को बढ़ाकर काम करती हैं जो अल्जाइमर रोग से मस्तिष्क में समाप्त हो जाता है। आमतौर पर यह दवाएं अल्जाइमर से लड़ने में पहले कदम के रूप में काम करती है. इन दवाओं की मदद से अधिकांश लोगों को लक्षणों में काफी सुधार नज़र आता है.

चोलिनेस्टरेज़ इनहिबिटर (cholinesterase inhibitors) भी घबराहट या अवसाद जैसे न्यूरोसाइकिएट्रिक (neuropsychiatric) लक्षणों में सुधार कर सकते हैं। आमतौर पर निर्धारित कोलिनेस्टरेज़ इनहिबिटर में डेडपेज़िल (एरिसेप्ट) Donepezil (Aricept), गैलेंटामाइन (रेज़ैडाइन ईआर) Galantamine (Razadine ER) और रिवास्टिग्माइन (एक्सेलॉन) Rivastigmine (Exelon) शामिल हैं। 

इन दवाओं के मुख्य दुष्प्रभावों में दस्त, मतली, भूख न लगना और नींद की गड़बड़ी शामिल हैं। कुछ हृदय विकारों वाले लोगों में, गंभीर दुष्प्रभावों में कार्डियक अतालता शामिल हो सकते हैं।

मेमेंटाइन (नमेंडा) Memantine (Namenda) :-

यह दवा एक अन्य मस्तिष्क कोशिका संचार नेटवर्क में काम करती है और मध्यम से गंभीर अल्जाइमर रोग के लक्षणों की प्रगति को धीमा कर देती है। इसे कभी-कभी कोलिनेस्टरेज़ इनहिबिटर के संयोजन में प्रयोग किया जाता है। अपेक्षाकृत दुर्लभ साइड इफेक्ट्स में चक्कर आना और भ्रम शामिल हैं।

अल्जाइमर से क्या जटिलताएं हो सकती है? What are the complications of Alzheimers? 

अल्जाइमर की वजह से रोगी को स्मृति और भाषा की हानि, बिगड़ा हुआ निर्णय और अल्जाइमर के कारण होने वाले अन्य संज्ञानात्मक परिवर्तन अन्य स्वास्थ्य स्थितियों के लिए उपचार को जटिल बना सकते हैं। जैसे-जैसे अल्जाइमर रोग अपने अंतिम चरण में आगे बढ़ता है, मस्तिष्क परिवर्तन शारीरिक कार्यों को प्रभावित करना शुरू कर देता है, जैसे निगलने, संतुलन और आंत्र और मूत्राशय पर नियंत्रण।


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