प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम – लक्षण, कारण और बचाव | Premenstrual Syndrome in Hindi

महिलाओं को हर महीने माहवारी यानि पीरियड्स का सामना करना पड़ता है जो कि बिलकुल सामान्य है। लेकिन काफी बार माहवारी की वजह से महिलाओं को कई शारीरिक और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम एक ऐसी ही समस्या है जो कि महिलाओं को माहवारी के दौरान अक्सर हो जाती है। आज इस लेख हम इसी विषय में बात करेंगे और इस बारे में अधिक जानेंगे। 

 प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम क्या है? What is Premenstrual Syndrome?

प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम (पीएमएस) उन कई समस्याओं या लक्षणों का एक समूह है जो कि महिलाओं को पीरियड्स के दौरान होती है। प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम को प्रागार्तव भी कहा जाता है। माहवारी चक्र शुरू होने के करीब एक से दो सप्ताह पहले अक्सर कई महिलाओं को इसके कुछ लक्षण दिखाई देते हैं जो कि माहवारी यानि पीरियड्स खत्म होने के बाद अपने आप समाप्त हो जाते हैं। वैसे तो यह लक्षण सामान्य होते हैं, लेकिन कई महिलाओं में यह लक्षण काफी गंभीर रूप धारण कर लेते हैं जिसकी वजह से उनका जीवन शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से प्रभावित होता है। 

क्या उम्र प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम को प्रभावित करती है? Does age affect premenstrual syndrome?

हाँ, उम्र प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम को प्रभावित करती है। माहवारी की शुरुआत 14 से 15 वर्ष के बीच शुरू हो जाती है, लेकिन पीएमएस की समस्या किस उम्र में होना शुरू होगी इस बारे में फ़िलहाल तक कोई स्पष्ट जानकारी मौजूद नहीं है। लेकिन आमतौर पर यह 25 से 45 वर्ष की महिलाओं को होने की आशंका बनी रहती है, पर पीएमएस की समस्या रजोनिवृत्ति के दौरान खत्म होना शुरू हो जाती है जिस दौरान महिलाओं की उम्र 45 वर्ष से अधिक होती है। 

जब महिलाएं 30 या 40 के उम्र के बीच होती है तो उस दौरान पीएमएस के लक्षण गंभीर हो सकते हैं, यह महिलाओं के उम्र का वह दौर होता है जब वह रजोनिवृत्ति के करीब होती है, इसे पेरिमेनोपॉज कहा जाता है। अगर महिलाओं को पीएमएस के कारण इस दौरान समस्याओं का सामना करना पड़े तो उन्हें रजोनिवृत्ति संक्रमण होने की आशंका हो सकती है। हाँ, लेकिन यह स्पष्ट है कि रजोनिवृत्ति के बाद जब माहवारी चक्र बंद हो जाता है तो महिलाओं को प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम यानि प्रागार्तव की समस्या होना हमेशा के लिए बंद हो जाती है।  

पीएमएस के लक्षण क्या है? What are the symptoms of PMS?

पीएमएस यानि प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम होने पर महिलाओं में जो लक्षण दिखाई देते हैं वह सामान्यत काफी हल्के होते हैं। लेकिन इसकी वजह से महिलाओं की दिनचर्या काफी प्रभावित होती है। ऐसा नहीं है कि हर महिला को माहवारी के दौरान पीएमएस के लक्षण दिखाई दें। अगर एक महिला को एक बार पीएमएस की समस्या होना शुरू हो जाए तो इसकी आशंका काफी बढ़ जाती है कि उन्हें अब हर मासिक धर्म से पहले इसके लक्षण दिखाई दें। पीएमएस होने पर जो लक्षण दिखाई देते हैं वह शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के होते हैं। हर महिला में प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम होने पर अलग-अलग लक्षण दिखाई देते हैं, ऐसा महिला के स्वास्थ्य, खानपान, रहन-सहन, मानसिक व्यहवार, पर्यावरण जैसी स्थितियों के कारण होता है। लेकिन सभी महिलाओं में शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के लक्षण दिखाई देते हैं। चलिए पीएमएस होने पर दिखाई देने वाले लक्षणों के बारे में जानते हैं :- 

भावनात्मक और व्यवहार संबंधी लक्षण :-

  1. चिंता बने रहना

  2. बेचैनी महसूस करना

  3. अकेलापन महसूस करना

  4. असामान्य क्रोध और चिड़चिड़ापन होना

  5. लगातार भूख में परिवर्तन होना 

  6. अचानक से मीठा खाने का दिल करना 

  7. समय-समय पर स्वाद में परिवर्तन होना

  8. नींद के पैटर्न में बदलाव

  9. मूड खराब बने रहना 

  10. खुद को लगातार बेकाबू होना 

  11. रोने का दिल करना 

  12. हर थोड़े समय में मूड बदलना 

  13. विश्वास मजबूत होना या कम होना

  14. सेक्स ड्राइव में कमी होना

  15. किसी भी चीज़ या जानकारी को याद रखने में कठिनाई

पीएमएस होने पर निम्नलिखित शारीरिक लक्षण दिखाई देते हैं :- 

  1. ब्लोटिंग की समस्या 

  2. शरीर में ऐंठन होना 

  3. गले में खराश होना 

  4. एक या दोनों स्तनों में सूजन 

  5. मुहांसे की समस्या 

  6. अचानक से कब्ज

  7. माहवारी होने तक दस्त

  8. लगातार सिर दर्द बने रहना 

  9. पीठ और मांसपेशियों में दर्द

  10. प्रकाश के प्रति असामान्य संवेदनशीलता

  11. रक्तचाप में वृद्धि होना 

प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम होने का क्या कारण है? What causes premenstrual syndrome?

अभी तक इस बारे में कोई सटीक जानकारी या कोई स्पष्टीकरण नहीं है कि महिलाओं को प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम आखिर होता क्यों है, फ़िलहाल इस विषय में शोध जारी है। फ़िलहाल निम्न वर्णित कुछ वजहों को प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम होने के पीछे का कारण माना जाता है :- 

हार्मोन में होता लगातार परिवर्तन – काफी स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि पीएमएस एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन के लगातार बदलते स्तर की प्रतिक्रिया में होता है। यह दोनों हार्मोन मासिक धर्म के दौरान प्राकृतिक रूप से उतार-चढ़ाव करते हैं। मासिक धर्म चक्र में ओव्यूलेशन के बाद होने वाले ल्यूटियल चरण के दौरान यह दोनों हार्मोन अपने चरम पर पहुँच जाते हैं और तेजी के साथ घटना शुरू हो जाते हैं। शरीर में अचानक से हुई इस हार्मोनल बदलाव की वजह से महिलाओं को मवाहरी के दौरान चिंता, चिड़चिड़ापन और मूड में अन्य परिवर्तन होने की समस्या होना शुरू हो जाती है। 

मस्तिष्क में रासायनिक परिवर्तन – मस्तिष्क में होने वाले रासायनिक परिवर्तन की वजह से भी महिलाओं को पीएमएस की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। हमारे मस्तिष्क में पाए जाने वाले न्यूरोट्रांसमीटर सेरोटोनिन और नॉरपेनेफ्रिन रसायन मूड, भावनाओं और व्यवहार को विनियमित करने का काम करते हैं। यह रसायन हमारे शरीर में किसी संदेशवाहक की तरह काम करते हैं। मासिक धर्म चक्र के दौरान इन दोनों रसायनों में परिवर्तन होना शुरू होता है जिसकी नींद की समस्याएँ बढ़ जाती है और खराब मूड की समस्या होना शुरू हो जाती है। 

मौजूदा मानसिक स्वास्थ्य स्थितियां – मासिक धर्म के दौरान महिला की मानसिक स्वास्थ्य स्थिति कैसी है इस पर भी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम होना निर्भर करता है। अगर महिला पहले से ही अवसाद और चिंता का शिकार है तो उन्हें प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम होने की आशंका ज्यादा होती है। जो महिलाऐं द्विध्रुवी विकार और प्रसवोत्तर अवसाद से जूझ रही है उन्हें भी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम होने की आशंका बनी रहती है। यह सभी समस्याएँ मवाहरी होने से पहले बढ़ सकती है। अगर किसी महिला प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के दौरान लगातार मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़े तो उन्हें प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (पीएमडीडी) होने की संभवना बढ़ सकती है जो कि पीएमएस का अति गंभीर रूप है।

पारिवारिक इतिहास – शोधों की माने तो काफी बार देखा गया है कि अगर किसी महिला के रक्त संबंध में पहले किसी महिला को पीएमएस या पीएमडीडी की समस्या रही तो भविष्य में उन्हें भी पीएमएस होने की आशंका बनी रहती है। 

खराब या अनियमित जीवन शैली – कुछ खराब आदतें या अनियमित जीवन शैली की वजह से पीएमएस की समस्या होने का कारण बन सकती है या उसे बढ़ा सकती है। इन आदतों में निम्नलिखित चीजे मुख्य रूप से शामिल है :- 

  1. धूम्रपान के आदि बनना 

  2. अच्छी नींद की कमी 

  3. लगातार शराब या अन्य नशीले उत्पादों का सेवन करना 

  4. ज्यादा वसा युक्त आहार का सेवन करना 

  5. ज्यादा कैफीन का सेवन करना

  6. चीनी और नमक का ज्यादा सेवन करना 

  7. नियमित शारीरिक गतिविधि में कमी

  8. ज्यादा डिब्बाबंद आहार का सेवन करना

  9. मांसाहार का सामान्य से ज्यादा सेवन 

  10. लंबे समय तक भूखे रहना, जिससे शरीर में जरूरी पौषक तत्वों की कमी होना। 

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पीएमएस और पीएमडीडी में क्या फर्क है? What is the difference between PMS and PMDD?

देखा जाए तो पीएमएस और पीएमडीडी में कोई खास फर्क नहीं है। प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर (premenstrual dysphoric disorder) पीएमएस का ही बढ़ा हुआ रूप है। जब पीएमएस के लक्षण ज्यादा बढ़ने लग जाए और उसकी वजह से महिला को ज्यादा और लंबे समय तक समस्याएँ होने लगे तो उसे ही प्रीमेंस्ट्रुअल डिस्फोरिक डिसऑर्डर यानि पीएमडीडी कहा जाता है। पीएमएस की तरह, पीएमडीडी के लक्षण एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और सेरोटोनिन के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण हो सकते हैं। पीएमडीडी होने पर महिला को निम्नलिखित लक्षणों को अनुभव कर सकती है :-  

  1. अवसाद होना या ऐसा अनुभव होना 

  2. बिना किसी कारण अचानक से उदास होना और लंबे समय तक उदासी बने रहना  

  3. अचानक से या हर कुछ समय में रोने का मन करना 

  4. हमेशा आत्महत्या के विचार आना 

  5. घबड़ाहट बने रहना 

  6. बिना किसी वजह के क्रोध या चिड़चिड़ापन

  7. लगातार बिना वजह के चिंता होना

  8. मूड में अचानक बदलाव होना

  9. दैनिक गतिविधियों में रुचि की कमी

  10. नींद न आना या अच्छी नींद न आना

  11. सोचने या ध्यान केंद्रित करने में परेशानी

  12. लगातार भूख लगना और पेट भरने के बाद भी लगातार खाते रहना

  13. स्वाद और खाने की पसंद में बदलाव होना 

  14. दर्दनाक ऐंठन, जिससे दवाओं से भी आराम न मिलना

  15. शरीर के कई हिस्सों में सूजन आना – विशेष रूप से स्तनों में

  16. मूत्राशय में दर्द बनना 

अगर आप इन लक्षणों को महसूस करती है तो निश्चित ही आप बड़ी परेशानी से जूझ रही है। यह लक्षण दर्शाते हैं कि आपको जल्द से जल्द बेहतर सलाह और चिकित्सीय उपचार की आवयश्कता है। 

पीएमएस होने पर डॉक्टर से कब मिलना चाहिए? When should I see a doctor if I have PMS?

माहवारी के दौरान अधिकांश महिलाएं पीएमएस के कम से कम कुछ लक्षणों को महसूस करती है जो कि सामान्य है। अगर पीएमएस के लक्षण आपके जीवन को प्रभावित नहीं करते हैं और केवल कुछ समय तक ही दिखाई देते हैं तो आपको डॉक्टर से इस बारे में बात करने की ज्यादा आवयश्कता नहीं है। लेकिन पीएमएस की वजह से दिखाई देने वाले लक्षण आपके जीवन में समस्याएँ पैदा करते हैं और लंबे समय तक रहते हैं तो आपको जल्द से जल्द इस विषय में अपने चिकित्सक से बात करने की आवयश्कता है।  जब आप इस बारे में डॉक्टर से बात करने जाएं तो उससे पहले इस बात की पुष्टि जरूर करें कि दिखाई देने वाले सभी लक्षण पीएमएस के ही हैं, याकि डॉक्टर को उपचार देने में आसानी हो सके।

पीएमएस या पीएमडीडी का निदान कैसे किये जा सकता है? How is PMS or PMDD diagnosed?

सबसे पहले आपको अपने अंदर पीएमएस या पीएमडीडी के लक्षणों की पहचान करनी होगी। इसके अलावा आप इस बारे में भी जानकारी रखें कि मासिक धर्म शुरू होने से पहले लक्षण कितने दिन पहले दिखाई देते हैं और माहवारी के कितने दिनों बाद तक लक्षण रहते हैं, इसके अलावा क्या इनकी वजह से आपको पीरियड्स में भी क्या कोई अन्य समस्या हो रही है। इन सभी के बारे में उचित जानकारी प्राप्त करने के बाद डॉक्टर को इस बात की पुष्टि करने में आसानी होगी कि आपको पीएमएस है या उसका बढ़ा हुआ रूप पीएमडीडी। 

पीएमएस या पीएमडीडी की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर आपकी निम्नलिखित प्रकार की जांच कर सकते हैं :- 

  • हार्मोनल जन्म नियंत्रण

  • शरीर में कैल्शियम, मैग्नीशियम, या विटामिन बी 6 सहित की जांच 

  • मेफ़ानामिक एसिड की जांच 

पीएमएस या पीएमडीडी का सटीक निदान करने के लिए डॉक्टर निम्नलिखित तरीके अपना सकते हैं :- 

  • डॉक्टर आपसे इस बारे में पूछ सकते हैं कि क्या आपके परिवार में पहले किसी को पीएमएस, पीएमडीडी, और अन्य मनोदशा और मानसिक स्वास्थ्य स्थितियों का सामना किया है। इससे इस बात की पुष्टि की जा सकती है कि कहीं आपको पीएमएस या पीएमडीडी वंशानुगत तो नहीं? 

  • आपके डॉक्टर आपसे इस बारे में पूछ सकते हैं कि क्या आपके परिवार में पहले कोई हाइपोथायरायडिज्म या एंडोमेट्रियोसिस सहित अन्य स्वास्थ्य स्थितियों से तो नहीं जूझ रहे थे? 

  • आपके लक्षणों के आधार पर दोच्योर स्त्री रोग संबंधी स्थितियों को दूर करने के लिए एक पैल्विक परीक्षा की सिफारिश कर सकते हैं। 

पीएमएस के निदान के लिए डॉक्टर आपको निम्नलिखित जांच करवाने की सलाह भी दे सकते हैं :- 

  • एनीमिया

  • एंडोमेट्रिओसिस Endometriosis 

  • थाइराइड 

  • चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (IBS)

  • क्रोनिक फेटीग सिंड्रोम

सबंधित रोग से जुड़ी तमाम जानकारी प्राप्त करने के बाद ही डॉक्टर आपको उचित उपचार प्रदान कर सकते हैं। 

प्रीमेंसट्रूअल सिंड्रोम में कौन-सी दवाएं ली जा सकती है? What medicines can be taken for premenstrual syndrome? 

एक बार जब डॉक्टर इस बात की पुष्टि कर लेते हैं कि आप प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम से जूझ रहीं हैं तो वह आपको जीवनशैली में कुछ बदलाव करने की सलाह दे सकते हैं जिससे आपको जल्द स्वस्थ होने में काफी मदद  मिलती है। इसके अलावा डॉक्टर आपको निम्नलिखित दवाएं लेने की सलाह भी दे सकते हैं ताकि आपको माहवारी के दौरान प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम या इसके बढ़े हुए रूप से जूझना न पड़े।  बता दें कि हर महिला को डॉक्टर अलग दवाएं दे सकते हैं, क्योंकि हर महिला में प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के अलग लक्षण दिखाई देते हैं। आमतौर पर डॉक्टर प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम होने पर निम्नलिखित निर्धारित दवाएं देते हैं :- 

अवसादरोधी दवाएं Antidepressants पीएमएस की समस्या होने पर डॉक्टर आपको अवसादरोधी दवाएं दे सकते हैं। अवसाद से जूझने वाले लोगों को यह दवाएं मुख्य रूप से रोजाना लेनी होती है, लेकिन पीएमएस से जूझने वाले महिलाओं को यह दवाएं रोजाना लेने की आवयश्कता नहीं होती उन्हें यह दवाएं बस मासिक धर्म शुरू होने के दो सप्ताह पहले लिए जाने की सलाह दी जाती है। कभी-कभी मासिक धर्म खत्म होने के बाद भी डॉक्टर महिलाओं को इन दवाओं को लेने की सलाह दे सकते हैं। इन दवाओं में मुख्य रूप से फ्लूक्साइटीन (प्रोजाक, सराफेम), पेरॉक्सेटिन (पक्सिल, पेक्सवा) और सर्ट्रालीन (ज़ोलॉफ्ट) दवा शामिल है। 

नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स Nonsteroidal anti-inflammatory Drugs (NSAIDs) पीएमएस से जूझने वाली महिलाओं को अक्सर एक या दोनों स्तनों में सूजन की समस्या हो जाती है। वहीं काफी बार जब पीएमएस की स्थिति खराब होने लगती है तो स्तनों के अलावा भी शरीर के कुछ हिस्सों जैसे – चेहरे, हाथ और पैरों में भी सूजन की समस्या होना शुरू हो जाती है। ऐसे में डॉक्टर आपको नॉनस्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स लेने की सलाह दे सकते हैं। 

मूत्रवर्धक दवाएं Diuretics  पीएमएस होने पर जब व्यायाम, आहार, और सूजन से छुटकारा दिलाने वाली दवाओं से भी सूजन की समस्या में राहत नहीं मिलती तो डॉक्टर आपको मूत्रवर्धक दवाएं लेने की सलाह दे सकते हैं। मूत्रवर्धक दवाएं लेने से आपके शरीर को आपकी किडनी के माध्यम से अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने में मदद मिल सकती है। स्पिरोनोलैक्टोन (एल्डैक्टोन) एक मूत्रवर्धक है जो पीएमएस के कुछ लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है।

हार्मोनल गर्भनिरोधक दवाएं Hormonal Contraceptive Drugs डॉक्टर हार्मोनल गर्भनिरोधक दवाओं को लेने की सलाह अंत में देते हैं। क्योंकि इनसे भविष्य में कई महिलाओं को गर्भ धारण करने में समस्याएँ हो सकती है। इन दवाओं को लेने से ओव्यूलेशन प्रक्रिया रूक जाती है जिससे पीएमएस से जुड़ी समस्याओं में राहत मिलती है। 

ध्यान दें, “किसी भी दवा का सेवन केवल डॉक्टर की सलाह से और उचित मात्रा में ही करें।

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षणों से कैसे राहत पाई जा सकती है? How can the symptoms of premenstrual syndrome be relieved?

हाँ, यह सत्य है कि प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम यानि पीएमएस का कोई सटीक उपचार नहीं है। इस दौरान ली जाने वाली दवाओं से केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिल सकती है। लेकिन अगर आप प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम से जूझ रही है तो आप निम्नलिखित कुछ उपायों की मदद से इसके लक्षणों में कमी कर सकती है जिससे आपको ज्यादा तकलीफ सहन नहीं करनी पड़ेगी। हल्के या मध्यम लक्षणों से राहत पाने के लिए, निम्नलिखित उपायों को अपना सकती है :- 

  • पेट की सूजन को कम करने के लिए तरल पदार्थ पी सकती है। इसमें लाल रास्पबेरी पत्ती या कैमोमाइल जैसी हर्बल चाय ले सकती हैं। इन चायों की मदद से पेट में होने वाली सूजन और ऐंठन को कम करने में मदद मिलती है। 

  • संतुलित आहार लें जिसमें भरपूर मात्रा में फल, सब्जियां और साबुत अनाज शामिल हों। ध्यान रहें, जितना हो सके उतना ताजा आहार लें, डिब्बाबंद आहार से दूरी बना कर रखने में समझदारी होगी। 

  • चीनी, नमक, कैफीन, और अल्कोहल के सेवन से दूरी बना कर रखें। खासकर तब जब आप प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षणों को महसूस कर रही हो। 

  • ऐंठन और मूड से जुड़े लक्षणों से राहत पाने के लिए आप अपने चिकित्सक से फोलिक एसिड, विटामिन बी -6, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे सप्लीमेंट ले सकते हैं। 

  • सूर्य की रोशनी, भोजन, या सप्लीमेंट आहार के माध्यम से अधिक विटामिन डी प्राप्त करने का प्रयास करें, इससे आपको प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम  में काफी मदद मिलेगी।

  • हर रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने का लक्ष्य रखें ताकि थकान दूर हो और समग्र स्वास्थ्य में सुधार हो।

  • अगर आप पीएमएस के दौरान ज्यादा मानसिक स्थितियों का सामना कर रही हैं तो इसके लिए आप योग करना शुरू करें और शांत संगीत या मनचाहा संगीत सुने। आप इस बारे में अपने किसी करीबी से भी कर सकती है। 

  • प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम के लक्षणों में कमी के लिए आप दिन भर में कम से कम 7 से 8 घंटे की नींद अवश्य लें। 

  • पीएमएस से राहत पाने के लिए आप दिन भर में कम से कम एक बार हल्का व्यायाम जरूर करें। इस विषय में आप किसी ट्रेनर से भी जानकारी लें सकती हैं। 

ध्यान दें, कोई भी उपाय अपनाने से पहले आप अपने चिकित्सक से सलाह ले सकते हैं।

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