लंग कैंसर के लक्षण और बचने के तरीके ?

लंग कैंसर के लक्षण और बचने के तरीके ?

जब फेफड़ो के उत्तक यानि टीश्यू बेहिसाब तरीके से बढ़ने लग जाएं, तो उसे फेफड़ों का कैंसर यानि लंग कैंसर कहते हैं । अगर इसका समय पर उपचार न किया जाए तो यह फेफड़ों के आस-पास की कोशिकाओं और भागों में भी फैल सकते हैं ।

लंग कैंसर के लक्षण ?

ये अवश्य हो सकता है कि किसी दूसरे कैंसर के लक्षण आपको पता न चले परंतु यदि शरीर में कैंसर घर कर रहा है तो इसका आभास आपको होने लगेगा, क्योंकि यह कैंसर आपकी स्वास नली को प्रतिबंधित करने के साथ-साथ ऐसे लक्षण दिखाता है कि आप महसूस कर लेते हैं कि कुछ समस्या है, जैसे –

खाँसते समय खून का आना
जब कभी आप खासेंगे तब आपके फेफड़ों से वायु के साथ रक्त का रिसाव हो सकता है, जिससे आपको हेमोप्टाइसिस होने का खतरा हो सकता है । ऐसा भी हो जाता है कि कभी-कभी खून का निकलना गंभीर हो जाता है । खून निकलने से रोकने के लिए अस्पताल में उपचार उपलब्ध हैं ।

छाती-कंधे में दर्द की शिकायत
फेफड़ों में होने वाला कैंसर, धीरे-धीरे फेफड़ों के साथ-साथ शरीर के दूसरे भागों में भी फैलना शुरु हो जाता है । ऐसी अवस्था में फौरन चिकित्सक का परामर्श लें और उसे विस्तार में दर्द के बारे में बताएं क्योंकि दर्द के निवारण के लिए इलाज मौजूद हैं ।

साँस लेने में तकलीफ़
यदि कोई व्यक्ति फेफड़ों के कैंसर से जूझ रहा है तो वह सांस लेते वक्त परेशानी का अनुभव कर सकता है, क्योंकि फेफड़ों का कैंसर श्वास नली को प्रभावित कर वायुमार्ग को बाधित कर देता है । लंग कैंसर फेफड़ों की नज़दीकी जगहों पर एक तरल पदार्थ का जमाव कर देता है और जिसकी वजह से सांस लेने में परेशानी होती है ।
 
आवाज़ का बदलना
अगर आप अपनी आवाज़ में भारीपन, हल्कापन या फिर किसी प्रकार का बदलाव महसूस कर रहे हैं तो यह भी लंग कैंसर का एक लक्षण हो सकता है । 
अगर इनमें से कोई भी लक्षण 3 सप्ताह या इससे अधिक समय से आपको महसूस हो रहे हैं तो अस्पताल जाने में संकोच न करें, फौरन डॉक्टर से संपर्क करें । 

लंग कैंसर से बचने के उपाय ?

सबसे पहले तो आप ये अच्छी तरह समझ लें कि आपको अपने डॉक्टर से कुछ भी छुपाना नहीं है । लंग कैंसर का इलाज तभी हो सकता है जब आप भी डॉक्टर को सहयोग करें । इलाज में वह लोग शामिल होते हैं जो लंग कैंसर को बेहतर तरीके से समझते हैं और इसीलिए वह इलाज में बेहतर तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं –

रेडिएशन थेरेपी
रेडिएशन थेरेपी एक आधुनिक चिकित्सा तकनीक है । इस तकनीक में विकिरणों के द्वारा कैंसर को बढ़ने से रोका जाता है । अगर आप ऑपरेशन या सर्जरी नहीं कराना चाहते तो इसको उपयोग कर सकते हैं । रेडिएशन थेरेपी को अकेले और कीमोथेरेपी, दोनों में प्रयोग किया जा सकता है ।

कीमोथेरेपी
कीमोथेरेपी मेडिकल साइंस की वह तकनीक है जिसमें कैंसर को बढ़ने से रोकने के लिए दवाईयों का प्रयोग किया जाता है । इसका प्रयोग सर्जरी से पहले और बाद में होता है । यदि सर्जरी बेहतर न ले और उसमें खतरा हो, तब कीमोथेरेपी का इस्तेमाल किया जा सकता है ।
 
सर्जरी
यह आधुनिक मेडिकल साइंस की देने है । इस विधि के ज़रिए कैंसर को उखाड़ दिया जाता है, परंतु इसके बाद व्यक्ति कमजोर हो जाता है । जिन लोगों को शुरुआत में ही लंग कैंसर का पता चल जाता है, उनके लिए यह सबसे सहज और सटीक इलाज है । 

लंग कैंसर के दूसरे इलाज में मालिश, एक्यूपंक्चर, मेडिटेशन जैसे दूसरे उपचारों के साथ-साथ दवाओं का भी अहम योगदान है । यह सब आप अपने इलाज के दौरान भी कर सकते हैं । इसके लिए समय-समय पर अपने डॉक्टर का परामर्श लेते रहें । 


लंग कैंसर में कौन-सी जांच करवानी चाहिए ?

सबसे पहले तो डॉक्टर को टेस्ट यानि जांच के आदेश देने चाहिए, ताकि पता चल सके कि वर्तमान स्थिति क्या है और फिर उसी के अनुसार उपचार करना चाहिए । इसी प्रकार लंग कैंसर का उचित इलाज हो सकता है । यह टेस्ट या जांचे कईं चरणों में होती हैं जैसे –

कंप्यूटर टोमोग्राफी स्कैन या (CT Scan)
वर्तमान में फेफड़ों की क्या स्थिति है, क्या किसी प्रकार की हानि हुई है या कुछ और दिक्कत है इसकी छवि जिसे इमेज कहते हैं, उसके लिए कंप्यूटर और एक्स-रे का सहारा लेकर पता लगाया जाता है ।

पोज़ीट्रान एमिशन टोमोग्राफी स्कैन (PET)
इस टेस्ट में रेडियो-सक्रिय सामग्री मेंएक सूक्षम आकार की सुई के डाली जाती है और रोगी के पूरे शरीर का स्कैन करके यह पता लगाया जाता है कि कैंसर का केंद्र कहां है ।

एक्स-रे
एक्स-रे के ज़रिए आपके फेफडों की तस्वीर निकालकर यह पता लगाने की कोशिश होती है कि फेफड़ों में क्या दिक्कत है ।

ब्रोंकोस्कोपी
मरीज़ के फेफड़ों के भीतर झांकने और उसके नमूने लेने के लिए एक ट्यूब का प्रयोग किया जाता है, जो फेफडों के सैंपल इक्ठ्ठा करके उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगा देते हैं । 

एंडोब्रोन्कियल अल्ट्रासाउंड (EBUS)
यह अल्ट्रासाउंड भी ब्रोन्कोस्कोपी का ही एक भाग है । इस टेस्ट में फेफड़ों का चित्र ध्वनि की तरंगों द्वारा बनाया जाता है । 

बायोप्सी
इसमें रोगी के फेफड़ों का एक सूक्ष्म यानि छोटा सैंपल लिया जाता है ताकि माइक्रोस्कोप में रखकर इस सैंपल की जाँच की जा सके और पता लगाया जा सकते कि फेफड़े किस हद तक काम कर रहे हैं ।

निष्कर्ष

लंग कैंसर यूं तो एक गंभीर समस्या है लेकिन यदि समय रहते इसकी पहचान कर ली जाए और सावधानियां रखते हुए इसका सही इलाज हो जाए तो इससे बचा जा सकता है । लंग कैंसर से बचने का सबसे बड़ा हथियार सावधानी है । अगर आप एक स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं तो लंग कैंसर से बचा जा सकता है ।