Heart Health Tips in Hindi | हृदय स्वस्थ्य के बारे में अनेक विषय

Heart Health Tips in Hindi | हृदय स्वस्थ्य के बारे में अनेक विषय

हृदय स्वस्थ्य के बारे में अनेक विषय


1. दिल की अनियमित धड़कन (अट्रियल फिब्रिलेशन)

अट्रियल फिब्रिलेशन अधिक सामान्य हृदय ताल विकार की तरह है। इसके कारण खून के थक्के होना, हृदय का काम ना कर पाना, स्ट्रोक आदि समस्याओं को उत्पन करता है। अट्रियल फिब्रिलेशन के मुख्य कारण उच्च रक्तचाप, हृदय आर्टरी रोग, अधिक उम्र और वजन का अधिक होना है। लेकिन अट्रियल फिब्रिलेशन के कारण युवा, स्वस्थ व्यक्ति, में भी हो सकता है। 

2. उच्च रक्तचाप

उच्च रक्तचाप के कोई लक्षण नहीं होते है लेकिन इसकी वजह से स्ट्रोक और हृदय का फेल होना जैसे गंभीर रोग हो सकते है साथ ही किडनी का फेल होना और डेमनटिया के खतरे कि बढ़ने की संभावना रहती है। उच्च रक्तचाप के कारण होने वाली बीमारी, मृत्यु आदि से बचा जा सकता है।

उच्च रक्तचाप के कुछ कारण निम्नलिखित है

1. शराब का अधिक सेवन

शराब का अधिक सेवन करने की वजह से रक्तचाप बढ़ सकता है इसलिए उच्च रक्तचाप से ग्रसित व्यक्तियों को शराब का सेवन नहीं करना चाहिए।

2. स्लीप एपनिया 

स्लीप एपनिया के कारण लगभग 30 प्रतिशत से लेकर 50 प्रतिशत तक व्यक्तियों को उच्च रक्तचाप की समस्या होती है। स्लीप एपनिया से ग्रस्त व्यक्तियों को डॉक्टर की सलाह पर उपचार कराना आवश्यक है।

3. वजन का अधिक होना

वजन के अधिक होने के कारण उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है इसलिए अस्वस्थ्य वजन को कम करने से उच्च रक्तचाप भी कम होता है।


3. कोलेस्ट्रॉल

कोलेस्ट्रॉल लिवर से निर्मित वसा जैसा पदार्थ है जिसे लिपिंड भी कहते है। कोलेस्ट्रॉल का संतुलन होना आवश्यक है शरीर में  कोलेस्ट्रॉल की मात्रा अधिक होने के कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक आदि गंभीर समस्या हो सकती है। रक्त प्लाजमा के माध्यम से कोलेस्ट्रॉल पूरे शरीर में जाता है और अनेक क्रियाओं को करने में मदद करता है। कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार के होते है पहला हाई डेंसिटी लीपॉप्रोटिन दूसरा लो डेंसिटी लीपॉप्रोटिन

 कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए वभिन्न उपाय

1. प्रत्येक दिन नियमित रूप से व्यायाम और शारीरिक गतिविधि करने से कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता है।

2. कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए फल सब्जियों और सलाद का सेवन प्रत्येक दिन करना चाहिए।

3. एंटी ऑक्सिडेंट आहार अधिक मात्रा में लेने चाहिए यह कोलेस्ट्रॉल को कम करने में अधिक मददगार साबित होता है। एंटीऑक्सिडेंट्स फलों, सब्जियों, नट्स और बीज में पाया जाता है।

4. कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए अधिक वसायुक्त आहार जैसे अंडा, मांसाहारी भोजन, धूम्रपान का सेवन नहीं करना चाहिए क्यूंकि यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते है।

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए आहार

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए अनेक आहार की जरूरत है लेकिन यह आहार सबके लिए बराबर नहीं होते है। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए अनेक आहार निम्नलिखित है।

1. फलों और सब्जियों का आहार

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए फलों और सब्जियों को भरपूर मात्रा में खाना चाहिए इनमें अनेक प्रकार के विटामिन, एंटीऑक्सिडेंट आदि पाए जाते है।

2. मछली का सेवन

जो व्यक्ति मांसाहारी भोजन खा सकता है उन्हें हफ्ते में दो बार मछली का भोजन करना चाहिए इसमें ओमेगा फैट्टी एसिड पाए जाते है।

3. नट्स का सेवन करे

नट्स में भरपूर मात्रा में खनिज, विटामिन्स आदि पाए जाते है इसलिए इनका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। 


हाई डेंसिटी लीपॉप्रोटिन (एच डी एल) 

एचडीएल यानी हाई डेंसिटी लीपॉप्रोटिन यह कोलेस्ट्रॉल का ही एक प्रकार है इसे गुड कोलेस्ट्रॉल भी कहते है। इसमें कई लोगो का मानना है कि हाई डेंसिटी लीपॉप्रोटिन हृदय बीमारियों से बचाता लेकिन अगर सच्चाई की बात करे तो हाई डेंसिटी लीपॉप्रोटिन का असर हृदय बीमारियों के लिए अधिक जटिल है। हाई डेंसिटी लीपॉप्रोटिन अधिक होने पर डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।

स्ट्रोक 

जब मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में खून के थक्के जम जाते है जिसके कारण रक्त वाहिकाओं में रक्त पूर्ण रूप से प्रवाह नहीं हो पाता है जिसके कारण स्ट्रोक यानी पक्षाघात होता है। स्ट्रोक अधिकतर अधिक उम्र के व्यक्तियों को होता है। रक्त के थक्के के कारण रक्त वाहिकाओं में खून का प्रवाह रुक जाता है और रक्त के प्रवाह को शुरू करने के लिए एजेंट टिश्यू प्लाजिमनोजेन को स्ट्रोक के तीन घंटे के अंतर्गत दिया जाता है।

स्ट्रोक के कुछ लक्षण निम्नलिखित है।

1. अचानक कमजोरी आना

2. बोलने में परेशानी होना

3. सिर के एक तरफ हिस्से में दर्द होना


हृदय सम्बन्धी बीमारी के लक्षण और उपचार

हृदय से सम्बन्धित बीमारियों को पहचानने के लिए कुछ लक्षण निम्नलिखित है।

1. हृदय का दर्द तनाव के कारण होने लगता है लेकिन यह आराम करने से ठीक हो जाता है। लेकिन हृदय का दर्द कई जोखिम कारकों जैसे हृदय बीमारी, हृदय बीमारियों से परिवार का इतिहास, उच्च रक्तचाप, डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना आदि को बढ़ावा देता है।

2. छाती में दर्द, जी मिचलाना, और सांस लेने में कठिनाई, घबराहट से सम्बन्धित हो तो तुरन्त डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

उपचार

यदि किसी व्यक्ति को हृदय से संबंधित बीमारी है तो वह डॉक्टर की सलाह पर दवाओं का सेवन करके इन सभी बीमारियों को दूर कर सकता है लेकिन जिन व्यक्तियों को हार्ट अटैक आता है उन्हें डॉक्टर आर्टरी स्टेंट द्वारा ठीक किया जाता है।

आर्टरी स्टेंट

हृदय की रक्त वाहिकाओं में खून का प्रवाह रुकने से हार्ट अटैक आता है जिसके लिए ब्लॉक हृदय धमनियों को खोलने के लिए आर्टरी स्टेंट की प्रक्रिया अधिक लाभदायक साबित होती है। और यह मजबूत रिसर्च का सबूत है धमनियों को खोलने के लिए इससे मृत्यु का,भविष्य में हृदय का नष्ट होना और भविष्य में हृदय का फेल होना इन सब खतरे को कम करता है।

निष्कर्ष

ह्रदय से संबंधित बिमारियों के कई लक्षण सामने आते है जिसका समय रहते डाक्टर कि सलाह पर उपचार कराना जरूरी होता है। कई बिमारियों को घर में जागरूकता से ही सही किया जा सकता है जैसे कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए वजन कम करना, वसा युक्त भोजन से बचना और उच्च रक्त चाप को कम करने के लिए शराब का सेवन ना करना आदि। ह्रदय को स्वस्थ रखने के लिए निम्नलिखित आहार का सेवन करना व गंभीर बिमारियों जैसे हार्ट अटैक, ह्रदय का फेल होने पर जल्द से जल्द डाक्टर के पास के जाना और उपचार कराना एक बेहतर विकल्प है।

संदर्भ में https://blogs.webmd.com/heart-health/default.htm